अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस

अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस

अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस

प्रति वर्ष 27 जून को सतत् विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals- SDGs) के कार्यान्वयन में सूक्ष्म, लघु और मध्यम आकार के उद्यमों की उपयोगिता को महत्त्व प्रदान करने के लिए सूक्ष्म, लघु और मध्यम आकार के उद्यम (Micro, Small and Medium-sized Enterprises -MSMEs) दिवस का आयोजन किया जाता है।

प्रमुख बिंदु:

  • सूक्ष्म ,लघु और मध्यम आकार के उद्यम दिवस को वर्ष 2017 में संयुक्त राष्ट्र (United Nations- UN) ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक प्रस्ताव पारित करके इसे नामित किया था ।
  • मई 2017 में ‘विकासशील देशों में एसडीजी हासिल करने में एमएसएमई की पूरी क्षमता हासिल करने के लिए राष्ट्रीय क्षमता बढ़ाना’ (Enhancing National Capacities for Unleashing Full Potentials of MSMEs in Achieving the SDGs in Developing Countries’) नामक एक कार्यक्रम प्रारंभ किया गया ।
  • इस कार्यक्रम को ‘संयुक्त राष्ट्र शांति और विकास कोष’ (United Nations Peace and Development Fund) के सतत् विकास उप-निधि के लिये 2030 एजेंडा द्वारा वित्तपोषित किया गया है। संयुक्त राष्ट्र उद्देश्य देशों द्वारा सतत् विकास लक्ष्यों की पहचान करके उनके बारे में जागरूकता फैलाना है।
  • 136 देशों के व्यवसायों के मध्य कोविड महामारी के पड़ने वाले प्रभाव पर किये गए एक अंतर्राष्ट्रीय व्यापार केंद्र सर्वेक्षण से ज्ञात हुआ है कि, लगभग 62 प्रतिशत महिला-नेतृत्व वाले छोटे व्यवसाय कोविड संकट से प्रभावित हुए हैं, जबकि पुरुष-नेतृत्त्व वाले व्यवसायों के लिए यह संख्या आधे से भी कम है, वहीं महिलाओं के नेतृत्व वाले व्यवसायों की कोविड से न बच पाने की संभावना 27% अधिक है।
  • औपचारिक और अनौपचारिक सभी फर्मों में ‘एमएसएमई’ की हिस्सेदारी 90प्रतिशत से अधिक है तथा कुल रोज़गार में औसतन 70 प्रतिशत और सकल घरेलू उत्पाद में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी है जिस कारण से वे ‘ग्रीन रिकवरी’ की स्थिति प्राप्त करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • वर्ष 2021 के अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस की थीम “ की टू एन इन्क्लूसिव एंड सस्टेनेबल रिकवरी (Key to an inclusive and sustainable recovery)” है।

भारतीय अर्थव्यवस्था में MSMEs की भूमिका:

  • सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम का देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 30 प्रतिशत का योगदान हैं। इस तरह ‘एमएसएमई’ भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं
  • निर्यात के क्षेत्र में वे आपूर्ति शृंखला का एक अभिन्न अंग हैं और देश के कुल निर्यात में लगभग 48 प्रतिशत का योगदान देते हैं।
  • ‘एमएसएमई’ रोज़गार सृजन में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और देश भर में लगभग ‘एमएसएमई’ क्षेत्र से 110 मिलियन लोगों को रोज़गार प्राप्त होता हैं।
  • विदित हो कि ‘एमएसएमई’ ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी जुड़े हुए हैं और लगभग आधे से अधिक ‘एमएसएमई’ ग्रामीण भारत में कार्यरत हैं।

‘एमएसएमई’ क्षेत्र को बढ़ावा देने संबंधी पहलें

  • सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय खादी, ग्राम और उद्योगों सहित ‘एमएसएमई’ क्षेत्र के वृद्धि और विकास को बढ़ावा देकर एक जीवंत ‘एमएसएमई’ क्षेत्र की कल्पना करता है।
  • वर्ष 2006 में ‘एमएसएमई’ को प्रभावित करने वाले नीतिगत मुद्दों तथा इस क्षेत्र की कवरेज एवं निवेश सीमा को संबोधित करने के लिये सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (MSMED) अधिनियम को अधिसूचित किया गया था।
  • प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम (PMEGP): यह एक क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी योजना है जो नए सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना और देश के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में रोज़गार के अवसर पैदा करने में बढ़ावा देता है।
  • पारंपरिक उद्योगों के उत्थान एवं पुनर्निर्माण के लिये कोष की योजना (SFURTI): इस योजना का उद्देश्य इसके लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है जिससे कारीगरों और पारंपरिक उद्योगों को समूहों में व्यवस्थित करने और इस प्रकार उन्हें वर्तमान बाज़ार परिदृश्य में प्रतिस्पर्द्धी बनने में सहायता भी मिले।
  • नवाचार, ग्रामीण उद्योग और उद्यमिता को बढ़ावा हेतु एक योजना (ASPIRE): यह योजना ‘कृषि आधारित उद्योग में स्टार्टअप के लिये फंड ऑफ फंड्स’, ग्रामीण आजीविका बिज़नेस इनक्यूबेटर ,प्रौद्योगिकी व्यवसाय इनक्यूबेटर के माध्यम से नवाचार और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देती है।
  • ‘एमएसएमई’ को वृद्धिशील ऋण प्रदान करने के लिये ब्याज सबवेंशन योजना: यह भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा शुरू की गई थी, जिसमें सभी कानूनी एमएसएमई को उनकी वैधता की अवधि के दौरान उनके बकाया, वर्तमान/वृद्धिशील सावधि ऋण/कार्यशील पूंजी पर 2% तक की राहत प्रदान की जाती है।
  • सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिये क्रेडिट गारंटी योजना: ऋण के आसान प्रवाह की सुविधा हेतु प्रारंभ की गई इस योजना के अंतर्गत MSMEs को दिये गए संपार्श्विक मुक्त ऋण हेतु गारंटी कवर प्रदान किया जाता है।
  • सूक्ष्म और लघु उद्यम क्लस्टर विकास कार्यक्रम (MSE-CDP): इसका उद्देश्य एमएसई की उत्पादकता और प्रतिस्पर्द्धात्मकता के साथ-साथ क्षमता निर्माण को बढ़ाना है।
  • क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी और टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन स्कीम (CLCS-TUS): इसका मुख्य कार्य संयंत्र और मशीनरी की खरीद के लिये 15 प्रतिशत पूंजी सब्सिडी प्रदान करके सूक्ष्म और लघु उद्यमों (एमएसई) को प्रौद्योगिकी उन्नयन की सुविधा प्रदान करना है।
  • चैंपियंस पोर्टल: इसका उद्देश्य भारतीय ‘एमएसएमई’ को उनकी शिकायतों को हल करके और उन्हें प्रोत्साहन, समर्थन प्रदान कर राष्ट्रीय और वैश्विक चैंपियन के रूप में स्थापित होने में सहायता करना है।
  • एमएसएमई समाधान पोर्टल: यह केंद्रीय मंत्रालयों,विभागों,सीपीएसई, राज्य सरकारों द्वारा विलंबित भुगतान के बारे में सीधे मामले दर्ज करने में सक्षम बनाता है।
  • उद्यम पंजीकरण पोर्टल: यह नया पोर्टल देश में MSME की संख्या पर डेटा एकत्र करने में सरकार की सहायता करता है।
  • MSME संबंध: यह एक सरकारी खरीद पोर्टल है। इसे केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों द्वारा MSE से सार्वजनिक खरीद के कार्यान्वयन की निगरानी के लिये शुरू किया गया था।

स्रोत: द हिन्दू

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